आज द्रौपदी नग्न हो रही भीड़ भरे चौराहों पर...

वह आजादी कहाँ मिली?
रजनीकांत शुक्ल

जैसी तुम कहते थे साथी, वह आजादी कहाँ मिली?
जनगण के मन की अभिलाषा, आखिर जाकर कहाँ फली?

आज द्रौपदी नग्न हो रही भीड़ भरे चौराहों पर,
तोड़े जंघा दुर्योधन की, कहाँ भीम से महाबली?

बीते दशक मगर अब तक, जंजीर होंठ पर भाषा की,
राष्ट्र अभी तक मूक, राष्ट्र को अपनी वाणी कहाँ मिली?

मेहनत अगर बराबर तो मेहनत का दाम बराबर है,
अधिकारों का यह बंटवारा, जहाँ मिले वह कौन गली?

रावण को तो मारा हमने, पर लौट केघर में हार गए,
एक बार संस्कृरति की सीता फिर अपनों से गई छली।

उन राहों का देख हश्र हम उन पर ही बढ़ते जाते,
अहं प्रश्न है आज यह सोचें, क्या शिक्षा का अर्थ यही?

Keywords: Rajnikant Shukla, Hindi Ghazal, Hindi Kavita, Hindi Poetry, Samyik Kavita, Indian Poetry, Modern Poetry

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9 टिप्‍पणियॉं:

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

आपकी यह पोस्ट आज के (२० फ़रवरी २०१३)Bulletinofblogपर प्रस्तुत की जा रही है | आभार

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

सुन्दर भाव व कथ्य ...बधाई...

Sadhana Vaid ने कहा…

सार्थक चिंतन से युक्त विचारणीय प्रस्तुति ! हर प्रश्न निरुत्तर सा करता हुआ ! बहुत खूब !

Kalipad "Prasad" ने कहा…


विचारनीय है
latest post पिंजड़े की पंछी

सुशील ने कहा…

वाह !

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

सच में आज के वक्त में भीम जैसे योद्धा की कमी बहुत खलती है

Kuldeep Thakur ने कहा…

आप ने लिखा... हमने पढ़ा... और भी पढ़ें... इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 23-08-2013 की http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस हलचल में शामिल रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दें...
और आप के अनुमोल सुझावों का स्वागत है...




कुलदीप ठाकुर [मन का मंथन]

कविता मंच... हम सब का मंच...

Pratibha Verma ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

Kuldeep Thakur ने कहा…

रावण को तो मारा हमने, पर लौट केघर में हार गए,
एक बार संस्कृरति की सीता फिर अपनों से गई छली।

उन राहों का देख हश्र हम उन पर ही बढ़ते जाते,
अहं प्रश्न है आज यह सोचें, क्या शिक्षा का अर्थ यही?

http://poetry.scientificworld.in/2013/02/blog-post.html
रावण को तो मारा हमने, पर लौट केघर में हार गए,
एक बार संस्कृरति की सीता फिर अपनों से गई छली।

उन राहों का देख हश्र हम उन पर ही बढ़ते जाते,
अहं प्रश्न है आज यह सोचें, क्या शिक्षा का अर्थ यही?

http://poetry.scientificworld.in/2013/02/blog-post.html

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