कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियाँ।


 
कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियां
-रंजना जायसवाल

कस्‍बों और छोटे शहरों,
दुकानों में भी दिख रही हैं आजकल
काम करती हुई
कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियाँ।
दुकान चाहे मोबाइल की हो
या डॉक्‍टरी की
ब्‍यूटी की
या आभूषणों की
हर जगह मौजूद हैं
कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियाँ।

आप इसे बदलते समाज में
बढ़ती हुई
स्‍त्री आत्‍म-निर्भरता का नाम दे सकते हैं
जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है
ये लड़कियाँ न तो ज्‍यादा पढ़ी लिखी हैं
ना उक्‍त काम की अपेक्षित जानकारी है
ना तो काम उनका कैरियर है
ना आत्‍मनिर्भता
वे खुद भी गंभीर नहीं है काम के प्रति
बस टाइमपास कर रही हैं
विवाह के पहले
कुछ पैसे भी मिल जाते हैं बदले में
शौक पूरा करने के लिए
इसलिए खुश हैं
कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियाँ।

दुकानदार जानते हैं यह बात
रखते भी हैं इन्‍हें इसलिए
उनको काबिलियत नहीं
फ्रेश चेहरे से मतलब है
जिनसे खिंचे चले आते हैं ग्राहक
वेतन भी देना पड़ता है मामूली सा
दिल भी बहलाती हैं
औ चली आती हैं आसानी से
जब तक कि बासी पड़ें इनके चेहरे
इनके जाते ही
आ जाते हैं फ्रेश चेहरे
जिनसे खिंचे चले आते हैं ग्राहक।
लड़कियाँ भी खुश हैं
काम के बहाने पा लेती हैं
चूल्‍हे चौके से फुरसत
सज धजकर निकलती हैं
मुक्‍त होती हैं बंदिशों
वर्जनाओं से
लेती हैं खुली हवा में साँस खुलकर
जी लेती हैं जिंदगी
अपनी मर्जी से कुछ घंटे
कहती हैं-शादी की पड़ते ही नकेल
बनना ही है कोल्‍हू का बैल
लड़कियों की इस सोच से
दुकानदारों की पौ बारह है।
खुद्दार, समझदार
और ज्‍यादा पढ़ी लिखी लड़कियाँ
नहीं टिक पातीं इन दुकानों पर
खुद्दार आग हो जाती हैं
खुद को समझे जाने पर सामान
समझदार हिस्‍सा चाहती हैं
उस मुनाफे में
जो आता है उनकी बदौलत
उच्‍च शिक्षित काम के अनुसार वेतन
और काम के घंटे
निर्धारित करने की बात करती हैं
दुकानदान निकाल फेंकता है बाहर
ऐसी लड़कियों को दूध की मक्‍खी की तरह।
उनके जाते ही आ जाती हैं
और भी कम पैसे में
कमसिन, सुंदर, अविवाहित लड़कियाँ
दुकानदार फिर कमाने लगता है
बिना तनाव के दुहरा-तिहरा लाभ
नई उम्र की ऊर्जा शक्ति
और सौन्‍दर्य का करके भरपूर इस्‍तेमाल
आप चाहें तो इसे बदलते समाज में
बढ़ती हुई स्‍त्री आत्‍म निर्भरता का नाम दे सकते हैं
जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है।

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14 टिप्‍पणियॉं:

Sunil Kumar ने कहा…

दोनों की अपनी अपनी सोंच के बीच सामंजस्य ...

Dineshrai Dwivedi ने कहा…

स्त्रियों के आत्मनिर्भर होने का मार्ग सीधा सरल नहीं है। वे ऐसे ही आगे बढ़ेंगी। पुरुष अपने स्वार्थ से ही सही उन्हें एक अवसर तो दे रहा है। वह नहीं जानता कि एक बार स्वतंत्रता का स्वाद पा लेने पर व्यक्ति पीछे नहीं लौटता।

रचना ने कहा…

kyaa yae kavita naari kavita blog par dubara publish ki jaa saktee haen
email sae suchit karae

Prakash Jain ने कहा…

Bada satik, swachh vyang...

aaj ki satyata ko darshata hai...



www.poeticprakash.com

Vijai Mathur ने कहा…

आंकलन एवं निष्कर्ष एकदम सटीक है।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही अच्छी रचना काबिले तारीफ
सुन्दर रचना के लिये बधाई स्वीकार करें !

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

सुंदर,
बहुत बढिया

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

इसमें काफी कुछ हकीकत है। काफी कुछ स्मार्ट, हेंडसम, पुरूष एक्जीक्यूटिव्स के साथ भी यही घटित होता है। दरअसल अगर आपके अंदर वो बात नहीं है तो ऐसा बाहरी रूप से, जवान महिला या पुरूष किसी के साथ भी हो सकता है। यह बात महिला के बारे में ही साग्रह नहीं कहनी चाहिए... क्योंकि उच्च पदों पर स्थापित बुद्धिजीवी महिला हो या पुरूष वो इस्तेमाल करते हैं .. सुन्दर पर बेवकूफ महिला या पुरूष की जवानी को। मुद्दा बनना चाहिए कि - नादान जैवरसायनो से प्रभावित जवानी का उत्कर्ष.... समाज को हासिल नहीं हो पाता।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आंकलन एवं निष्कर्ष एकदम सटीक है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गहरा आंकलन किया है आज की सामाजिक परिस्थिति का नारी के वर्तमान को लेकर ...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आपकी पोस्ट की खबर हमने ली है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - रोज़ ना भी सही पर आप पढ़ते रहेंगे - ब्लॉग बुलेटिन

Kamlesh Kumar Diwan ने कहा…

umda likha hai

सुमन'मीत' ने कहा…

बहुत सुन्दर ...

संतोष पाण्डेय ने कहा…

क्या बात है. निश्चित ही. ऐसा बिलकुल नहीं है.

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