प्रेम एक दलदल है...

 


-प्रो0 हरिमोहन शर्मा

प्रेम एक दलदल है
अच्छा हुआ
मैं बच गया।

देखा है मैंने
प्रेमियों को
टूटकर रोते।
देखा है उन्हें चेहरा छिपाते।
प्यार के लिए करुणा जगाने के
नए-नए अभिनय करते
धोखा देने और विश्वास जमाने के
नायाब तरीक़े अपनाते।

छोटी-छोटी बातों पर
लड़ते हैं प्रेमी।
दुखी होते हैं
बेचैन अपनी-अपनी हालत पर।

शुरू होती है उनकी यात्रा
एक-दूसरे के सुख-दुख के बीच
आने-जाने से।
ख़त्म हो जाती
सब कुछ एक साथ
न पाने से!

अच्छा ही हुआ
मैं न कर सका किसी को प्यार।
पता नहीं मेरे कारण
मेरी प्रेमिका को
कितना और कहाँ
झूठ बोलना पड़ता।
छिपानी होतीं अपनी ख़ुशियाँ
उदासी
अपने ऑंसू
घबराहट...
चुरानी पड़ती नज़रें।

चक्कर काटती वह ज्योतिषियों के
कहाँ-कहाँ फैलाती हाथ
मांगती मन्नतें।
कहाँ-कहाँ भटकती
मेरे लिए
अच्छे-से-अच्छा
उपहार ढूंढने।

मुझे भी भटकना पड़ता
नए से नया प्रिंट ढूंढते हुए
कपड़ों के मेले में।

उपस्थित रहते हुए भी
हम दोनों
नहीं होते-
अपने दफ्तर में
अपनी-अपनी कुर्सी पर
जबकि रखे रहते मेज़ पर टिफ़िन।
कष्ट पाती उसकी अन्तरात्मा
अपने सरल माता-पिता के
विश्वास को धोखा देते हुए

कष्ट पाता मैं
उसे उसके सीधे-सुखी
रास्ते से भटका कर।

बर्बाद हो जाती
कितनों की
कितनी ज़िन्दगी।

यों सब कुछ अच्छा ही हुआ
सीधा-सादा चलता रहा मैं।

बस यही बुरा हुआ
मैं आदमी नहीं बन पाया
बिना प्यार के;
यों ही
मारा गया!

-प्रो. हरिमोहन शर्मा


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19 टिप्‍पणियॉं:

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

Prem ke bheetar ka sach ujagar karti hui bahut prabhavi rachana ...dil ko chhu gyi.

राकेश कौशिक ने कहा…

प्रो हरिमोहन शर्मा जी की रचना पढवाने के लिए आभार

Anamika ने कहा…

हरिमोहन जी एक प्रतिष्ठित रचनाकार हैं। उनकी रचना पढकर प्रसन्‍नत हुई।

Anita ने कहा…

प्रेम न कर पाने की कीमत ज्यादा चुकानी पड़ी बनिस्बत प्रेम करने के...

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

आदरणीय श्री ज़ाकिर अली जी
बहुत सुन्दर रचना शेयर करने के लिये बहुत बहुत आभार,

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

ACHCHHA LAGA ITNE PYARE SE RACHNA KO PADHKAR!

Shah Nawaz ने कहा…

Behtreen!!!

sushma 'आहुति' ने कहा…

khubsurat aur prabhaavpurn rachna...

नीरज जाट ने कहा…

बहुत बढिया प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्रेम एक दलदल है
अच्छा हुआ
मैं बच गया।.... प्यार अगर अन्दर हो तो बचना मुमकिन नहीं , और डूब जाना भी इक प्राप्य है, जो सबके हिस्से नहीं आता

vidhya ने कहा…

Behtreen

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्रेम ऐसा भी होता है ... अच्छी रचना से मिलवाया आपने ज़ाकिर जी ..

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत बढ़िया सर।

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कल 29/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB ने कहा…

खुबसूरत रचना....
सादर...

Dorothy ने कहा…

प्रो हरिमोहन शर्मा जी की रचना पढवाने के लिए आभार.
सादर,
डोरोथी.

सदा ने कहा…

बहुत ही बढि़या ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति

veerubhai ने कहा…

मैं आदमी नहीं बन पाया बिना प्यार के यूं ही मारा गया .प्रेम जीवन के होने की पहली शर्त है .. .कृपया यहाँ भी http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/पधारें -
http://veerubhai1947.blogspot.com/
.

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