अपनी संस्कृति को त्याग-त्याग, फिर गीत उन्हीं का गाया है।

-महेन्‍द्र प्रताप पाण्‍डेय 'नन्‍द'-

वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ, जिसको हमने अपनाया है।
अपनी संस्कृति को त्याग-त्याग, फिर गीत उन्हीं का गाया है।।

चाय काफिया काफी को, छोड़ा उन लोगो ने लाकर।
हमने फिर ग्रहण किया उसको, उनका सहयोग सदा पाकर।
अमृत सम दुग्ध धरित्री से, जाने का गीत सुनाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।1।।

पहले कपड़े सम्पूर्ण अंग को, भर शृंगार कर देता था।
जब अंगराग से पूरित तन, मन में उमंग भर देता था।
मृदु महक धरा से दूर हुयी, परफ्यूम ने धूम मचाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।2।।

जनक पिता बापू कहते, सन्तोष बहुत मिल जाता था।
भैया चाचा दीदी बेटी, सुनने से दिल खिल जाता था।
पापा कहने से मिटा लिपिस्टिक जब, डैडी का चलन बढ़ाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।3।।

धोती कुर्ता रमणीय वेष, खद्दर की टोपी दूर हुयी।
डिस्को क्लब सिगरेट चषक, की भार बहुत भरपूर हुयी।
कटपीस के कटे ब्लाउज ने, भारत में आग लगाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।4।।

बच्चा पैदा होते ही अब, अंग्रेजी मे ही रोता है।
ए बी सी डी को सीख सीख, हिन्दी की गति को खोता है।
सब छोड़ संस्कृति देवों की, दानव प्रवृत्ति अपनाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।5।।

थे राम कृष्ण अवतार लिये, यह बात बताया भारत में।
चैत्र मास से ऋषियों ने, नव वर्ष चलाया भारत में।
चले गये अंग्रेज मगर, अंग्रेजी नव वर्ष मनाया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।6।।

काल खोलकर मुँह बैठा, पर हैप्पी बर्थ मनाते है।
मन मन्दिर में जो प्रेम छिपा, आई लव यू कह कर गाते है।
सम्पूर्ण नग्नता छाने को, यह पाँप का म्यूजिक आया है।।
वो चले गये कुछ छोड़ यहॉ जिसको हमने अपनाया है।।7।।


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7 टिप्‍पणियॉं:

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

बेहतरीन .... बहुत सुन्दर .अच्छा लगा....

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

बहुत ही सच बात है भाई .......... बेहतरीन पोस्ट.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

महेन्‍द्र प्रताप पाण्‍डेय 'नन्‍द' जी का गीत पढ़ने का अवसर देने के लिए
प्रिय बंधुवर ज़ाकिर अली ‘रजनीश’जी आपका बहुत बहुत आभार !

अच्छा गीत है । यहां आप हमेशा बहुत श्रेष्ठ रचनाओं का रसास्वादन कराते हैं , तदर्थ आभार !

बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Dr Varsha Singh ने कहा…

बेहतरीन पोस्ट.....

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुंदर।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

महेन्‍द्र प्रताप पाण्‍डेय 'नन्‍द' जी ने मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ जी बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको भी हार्दिक बधाई।

ज्योति सिंह ने कहा…

sachchi baate hai is sundar rachna me .

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