हंसो और मर जाओ -अशोक चक्रधर

 
-अशोक चक्रधर-

ये हंसी भी चीज़ करामाती है,
आती है तो आती है
नहीं आती है तो
नहीं आती है.
आप कोशिश करते रहिये
हंसाने की
नहीं आएगी,
और आएगी
तो बिना बात की बात पर
आ जायेगी.

एक साहब
जो हर किसी को
हंसाने का
दम भर रहे थे,
एक बार
एक गैंडे को
गुलगुली कर रहे थे.
बहुत प्रयास किया
लेकिन गैंडामुस्कुरा के भी नहीं दिया.
हाथ-भर गुलगुली पर
एक इंच नहीं हंसा,
तो सामने वाले ने
ताना कसा-
बड़ा दम भरते थे
बड़ी ताल ठोकते थे
बड़ा अहंकार दिखाया,
पर गैंडा तो नहीं मुस्कुराया.

तो साब,
जैसे तैसे
उन्होंने झेंप मिटाई,
बोले-
खाल मोटी है ना भाई!

और हैरत की बात ये
की इस बात पर
गैंडा मुस्कुरा दिया,
हमने कहा-
मियाँ!
ये हंसी भी
चीज करामाती है,
आती है तो आती है,
नहीं आती है
तो नहीं आती है.
और जब आती है
तो तो धुआंधार आती है
रोके नहीं रुक पाती है,
दबाने की हर कोशिश
नाकाम हो जाती है.
होंठ भले ही सी लो
पर चेहरे पर
आँखों में, अदाओं में
झिलमिलाती है.

गाल गुलेल हो जाते हैं,
सारे ब्रेक फेल हो जाते हैं.
ये हंसी अपना शिकंजा
कुछ इस तरह कसती है,
की मुंह-दांत भींच लो
तो तोंद हंसती है.
देखा है कभी
किसी तोंद का हंसना?
जैसे फैट्स के दरिया में
कैट्स का उछलना!

कहते हैं-
जानवर और इंसान में
अंतर यही है,
की आदमी के पास हंसी है
जानवर के पास नहीं है.
और इसलिए
मेरा ये पुख्ता बयान है,
की जो नहीं हंसता
वो जानवर-समान है.

दोस्तो,
दरअसल ये हंसी बहुआयामी है,
जिगर, फेफड़े, आंत, यकृत, तिल्ली,
गुर्दे, पसली, पेट की झिल्ली,
इन सब के लिए व्यायामी है.

जो अट्ठास करते हैं
उनके तो हाथ-पैर,
पेट, पाचन-तंत्र
सबकी मशक्कत हो जाती है,
जो मनहूस हैं
उन्हें कब्ज़ की
दिक्कत हो जाती है.
पर सवाल तो यही है
की कमबख्त आती है तो आती है
नहीं आती है तो नहीं आती है.

यों कभी-कभी
हंसी भी आती है अकेले में,
ये हंसी कुछ ऐसी होती है
जैसे मसाला छिपा रहता है
करेले में.
एक बार ब्रह्मा जी
अपने आफिस में
अकेले बैठे
ढूंढ रहे थे लेखनी,
क्योंकि
अशोक चक्रधर की फाइल बंद करके
सुरेन्द्र जी की थी देखनी.
बहुत धूंढ़ी, बहुत धूंढ़ी, नहीं मिली,
पर अचानक उस एकांत में
उनकी बत्तीसी खिली,
क्योंकि लेखनी लगी थी
उनके कान पर,
और हम यह सोचकर
बलिहारी हैं
बह्मा जी की मुस्कान पर
की हंसी आती है
अपनी भूल पर,
हंसी ब्याज पर आती है
न की मूल पर.
इसलिए वो हंसी अछी
जो अपने पर आये
वो हंसी अधम जो किसी को सताए.

लोग अक्सर हँसते हैं
की सामने वाला शख्स
एन्चकताना है,
लूला है, लंगडा है, काना है.
अगर उसकी जगह तुम होते
तो सोचो
की हँसते या रोते!
कमजोर पर हंसने में
कोई धाक नहीं है,
मोटरों,
मजाक करना कोई मजाक नहीं है.
अछा,
कभी-कभी उस हंसी पर
हंसी आती है
जो हंसी आती है देर से,
कभी-कभी हंसी आती है
शब्दों के उलटफेर से.


इस चराचर में
चौरी-चौरा के चौबारे में
चारा-चोरी पर इसलिए हंसो
क्योंकि हंसने के अलावा
कोई चारा नहीं है,
देखो, फंसने वाला भी
हंस रहा है
क्योंकि वो बेचारा नहीं है.
फंसा शायद इसलिए
की चारा सबके लिए
बराबर नहीं था,
शेयर घोटाले पर इसलिए हंसो
क्योंकि घोटाले में
शेयर बराबर नहीं था.

हमारे एक मित्र
सीढ़ियों से फिसल गए,
वर्णन करने लगे तो
ऊटपटांग शब्द
उनके मुंह से निकल गए.
चाट पर भले गए,
फिसली से ऐसे सीढ़े
कि सीढ़ते ही चले गए
सीढ़ते ही चले गए.

नवजात बच्चों की हंसी
मान कि घुट्टी में है,
बड़े बच्चों की हंसी
स्कूल की छुट्टी में है,
और हमारे नेताओं की हंसी
सी बी आई की मुट्ठी में है.

ये हंसी एक चमत्कार है
चेहरे के भूगोल में
होठों का विभिन्न-कोडीय प्रसार है.
पिताजी हँसे तो फटकार है
माँ हँसे तो पुचकार है
बीवी हँसे तो पुरस्कार है
पति हँसे तो बेकार है
उधार देने वाला हँसे तो इनकार है
लेने वाला हँसे तो उसकी हार है
दुश्मन हँसे तो कटार है
पागल हँसे तो विकार है
विलन हँसे तो हाहाकार है
पडोसी हँसे तो प्रहार है
दुकानदार हँसे तो भार है
हीरो हँसे तो झंकार है
हिरोइन हँसे तो बहार है
प्रेमिका हँसे तो इज़हार है
प्रेमी हंसे तो फुहार है
ओ हंसी
'तू धन्य है, तुझे धिक्कार है'.
क्योंकि जहां नहीं आनी चाहिए
वहाँ आने में देर नहीं लगाती है,
एक पल में महाभारत कराती है.
हंसी चीज़ करामाती है,
आती है तो आती है
नहीं आती है तो नहीं आती है.

ऐसी हालत में
कभी मत हंसना
जब सामने वाले के पास छिलका
और तुम्हारे पास
केवल संतरा हो,
मत हंसना जब
पागल के हाथ में चुरा हो.
कभी मत हंसना
जब नाई के हाथ में
उस्तरा हो.

मत हंसना
जब डाक्टर को
बिना चश्मा
देखने में बाधा हो,
और तुम्हारे शरीर में
उसका इंजेक्शन आधा हो.

मत हंसना
जब पोलिंग बूथ पर
बुर्के में आदमी
लगा रहा ठप्पा हो,
या तब जब
कन्या के छोटे-से मुंह में
बड़ा-सा गोलगप्पा हो.

हंसी
एक छूत का रोग है,
हंसी
एक सामूहिक भोग है.
तुम हंसोगे
तो तुम्हारे साथ हंसेगा
पूरा ज़माना,
रोओगे
तो अकेले में पडेगा
आंसू बहाना.

सबसे अछी हंसी वो
जो अपने पर
दूसरों को हंसाये,
वो हंसी क्या
जो निर्बल का
कलेजा जलाए.

मजा तो तब है जब
आंसुओं की कहानी भी
हंसी में कह जाओगे,
वरना हंसी के बिना
जिंदगी में जिंदगी को
ढूंढते रह जाओगे!
अपने ऊपर इसलिए हंसो
कि तुमने दुनिया को नहीं समझा,
दुनिया पर इसलिए हंसो
कि दुनिया ने
तुम्हे नहीं समझा.

अपनी भूलों पर
इसलिए हंसो
कि सुधार नामुमकिन है,
अपनी कामनाओं पर
इसलिए हंसो
कि पूरी नहीं होंगी.

मोहियों पर इसलिए हंसो
कि मोह झूठा है,
द्रोहियों पर इसलिए हंसो
कि द्रोह झूठा है.

करुना, वात्सल्य, श्रृंगार, अंगार
वीभत्स, भयानक, अद्भुत, अचानक
सारे मनोभावों में
भ्रान्ति ही भ्रान्ति है,
एक केवल हास्य है
जिसमे विश्वशांति है.
हंसो तो सच्चों जैसी हंसी,
हंसो तो बच्चों जैसी हंसी.
इतना हंसो कि तर जाओ
हंसो और मर जाओ.
हंसी एक फटे-दिल के लिए
मुहब्बत कि पाती है,
पर समस्या यही है कि
कमबख्त
आती है तो आती है,
नहीं आती है
तो नहीं आती है.

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18 टिप्‍पणियॉं:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... मज़ा आ गया इस हास्य और व्यंग रस का ....

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

चक्रधर साहब भी कमाल के है......... बिल्कुल हंसी के तो पीछे ही पड़ गये. हंसी भी सोंच रही होगी की आप किसके पल्ले पड़ी जो मेरी मुफ्त में जन्म कुंडली तैयार हो ली............ सुंदर प्रस्तुति.

kunnu ने कहा…

LAAJAWAB.

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

आम आदमी के हित में आपका योगदान महत्वपूर्ण है। उपयोगी जानकारी देने के लिए धन्यवाद!
आज हम चरित्र-संकट के दौर से गुजर
रहे हैं। कोई ऐसा जीवन्त नायक युवा-पीढ़ी
के सामने नहीं है जिसके चरित्र का वे
अनुकरण कर सकें? प्रेरक रचना के लिए
बधाई।
============================
मुन्नियाँ देश की लक्ष्मीबाई बने,
डांस करके नशीला न बदनाम हों।
मुन्ना भाई करें ’बोस’ का अनुगमन-
देश-हित में प्रभावी ये पैगाम हों॥
सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी

Asha ने कहा…

मैंने पहले भी आपको कई बार सुना है |आज अचानक ब्लॉग पर आपकी कविता पढ़ कर उज्जैन में हुए टेपा सम्मलेन की याद ताजा हो गयी जब आपको उसमें आमंत्रित किया गया था |
इस कविता के लिए मेरी बधाई स्वीकार करें |कभी मेरे ब्लॉग आकांक्षा पर आ मुझे गौरान्वित होने का
अवसर दें तो मुझे प्रोत्साहन मिलेगा |
आशा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Aasha ji, ye Ashok chakradhar ji ka blog nahi hai. Maine (Zakir Ali Rajnish) unki kavita prakashit ki hai.
---------
हिन्‍दी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले ब्‍लॉग।

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत दिनों से सोच रही थी कोई एसा ब्लॉग मिले जहां हंसी की बात हो लो देखो जिसे खोज रही थी वो यहाँ मिल गया !
बहुत खूब बात कही आपने हंसी पर सच मै हंसी एसी ही तो होती है जब चाहो की इसमें हंसी आएगी पर वहां आती नहीं और न हंसने वाली बात मै ही आ जाती है !
सुंदर रचना बधाई दोस्त !

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

आपकी बड़ी प्रसंसक हूँ ..ब्लॉग में ...पढ़ कर ख़ुशी हो रही है ....शुभकामनायें

Fauziya Reyaz ने कहा…

he he he...mazedaar

great collection

mridula pradhan ने कहा…

padh-padhkar hum bhi hans liye.

zakir ने कहा…

बहुत अच्छी कविता लिखी है..........

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह वाह .. ग़ज़ब का हास्य व्यंग ... कहाँ से लाए इस रचना को ... लाजवाब है ...

वीना ने कहा…

अशोक जी को सुनना तो अच्छा लगता ही है तो पढ़ना भी अच्छा लगा....
बहुत अच्छी कविता

"पलाश" ने कहा…

bahut achchi poem , hansi bhi aai aur maza hbi .
thanks for puting the ashok ji 's poem at the blog .

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आद . जाकिर अली रजनीश जी ,
अशोक जी की कविता में हास्य और व्यंग्य का अदभुत सामंजस्य होता है ! उनके पढने का अंदाज़ तो श्रीताओं को मन्त्र मुग्घ कर देता है !
मुझे उनके सानिध्य में काव्य पाठ का अवसर मिला है !

Dr.Dinesh pathak shashi ने कहा…

Bhai Rajneesh ji,Namaskar.
Kafi time se aapse mulakaat nahi huee.aaj aapke blog par Ashok Chakradhar ji ki hasya kavita padi.Achchhi rachna lagaayee hai aapne. Badhaee.
Dr.Dinesh pathak shashi.Mathura.

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

'कहते हैं-
जानवर और इंसान में
अंतर यही है,
की आदमी के पास हंसी है
जानवर के पास नहीं है.
और इसलिए
मेरा ये पुख्ता बयान है,
की जो नहीं हंसता
वो जानवर-समान है.'


'कमजोर पर हंसने में
कोई धाक नहीं है,
मोटरों,
मजाक करना कोई मजाक नहीं है.'

'नवजात बच्चों की हंसी
मान कि घुट्टी में है,
बड़े बच्चों की हंसी
स्कूल की छुट्टी में है,
और हमारे नेताओं की हंसी
सी बी आई की मुट्ठी में है.'

'ये हंसी एक चमत्कार है
चेहरे के भूगोल में
होठों का विभिन्न-कोडीय प्रसार है.
पिताजी हँसे तो फटकार है
माँ हँसे तो पुचकार है
बीवी हँसे तो पुरस्कार है
पति हँसे तो बेकार है
उधार देने वाला हँसे तो इनकार है
लेने वाला हँसे तो उसकी हार है
दुश्मन हँसे तो कटार है
पागल हँसे तो विकार है
विलन हँसे तो हाहाकार है
पडोसी हँसे तो प्रहार है
दुकानदार हँसे तो भार है
हीरो हँसे तो झंकार है
हिरोइन हँसे तो बहार है
प्रेमिका हँसे तो इज़हार है
प्रेमी हंसे तो फुहार है
ओ हंसी
'तू धन्य है, तुझे धिक्कार है'.
क्योंकि जहां नहीं आनी चाहिए
वहाँ आने में देर नहीं लगाती है,
एक पल में महाभारत कराती है.
हंसी चीज़ करामाती है,
आती है तो आती है
नहीं आती है तो नहीं आती है.'

'मत हंसना जब
पागल के हाथ में चुरा हो.
कभी मत हंसना
जब नाई के हाथ में
उस्तरा हो.'

'अपने ऊपर इसलिए हंसो
कि तुमने दुनिया को नहीं समझा,
दुनिया पर इसलिए हंसो
कि दुनिया ने
तुम्हे नहीं समझा.'

बहुत बड़ी कविता है। इतनी बड़ी होने से कुछ ठीक नहीं लगती लेकिन ऊपर की पँक्तियाँ पसन्द आईं। बेहतर! बड़ी कविता पर बड़ी टिप्पणी।

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता | हंसी कभी आई कभी नहीं आई ब्कोस कविता का काफी है लम्बाई और चौड़ाई | पर जितनी भी आई बहुत खूब आई और जोर जोर के आई | मैं फैन हूँ अशोकजी का | बहुत ही बढ़िया और अद्भुत लिखते हैं | बधाई |

Tamasha-E-Zindagi
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