अब असर होता नहीं गर पाँव में काँटा चुभे, ज़िन्दगी तूने हमें ऐसे चुभाये हैं गुलाब।

-संदीप 'साहिल'

कब से ये काँटों में हैं, क्यों ज़ख्म खाए हैं गुलाब?
अपने खूँ के लाल रंगों में नहाये हैं गुलाब।

फर्क इतना है हमारी और उसकी सोच में,
उसने थामी हैं बंदूकें, हम उठाये हैं गुलाब।

होश अब कैसे रहे, अब लड़खड़ाएँ क्यों न हम,
घोल कर उसने निगाहों में, पिलाये हैं गुलाब।

अब असर होता नहीं गर पाँव में काँटा चुभे,
ज़िन्दगी तूने हमें ऐसे चुभाये हैं गुलाब।

कुछ पसीने की महक, कुछ लाल मेरे खूँ का रंग,
तब कहीं जाकर ज़मीं ने ये उगाये हैं गुलाब।

खार होंगे, संग होंगे, और होगा क्या वहां?
इश्क की गलियों में 'साहिल' किसने पाए हैं गुलाब?
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15 टिप्‍पणियॉं:

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

फर्क इतना है हमारी और उसकी सोच में,
उसने थामी हैं बंदूकें, हम उठाये हैं गुलाब।

बहुत ख़ूब !
अच्छी ग़ज़ल

अनुष्का श्रीवास्तव ने कहा…

सुंदर गजल।

ehsas ने कहा…

अब असर होता नहीं गर पाँव में काँटा चुभे,
ज़िन्दगी तूने हमें ऐसे चुभाये हैं गुलाब।
वाह वाह क्या कहने।

daanish ने कहा…

अब असर होता नहीं गर पाँव में काँटा चुभे,
ज़िन्दगी तूने हमें ऐसे चुभाये हैं गुलाब।

ग़ज़ल के शेर के ज़रिये
मन की बहुत गहरी बात कह डाली आपने ...
अच्छी ग़ज़ल के लिए
मुबारकबाद .

M VERMA ने कहा…

फर्क इतना है हमारी और उसकी सोच में,
उसने थामी हैं बंदूकें, हम उठाये हैं गुलाब।

बहुत सुन्दर गज़ल

Shah Nawaz ने कहा…

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल!!!

संदीप जी और उनकी ग़ज़ल से मुलाक़ात करवाने के लिए जाकिर भाई का बहुत-बहुत शुक्रिया!!!

वन्दना ने कहा…

बेहतरीन गज़ल्।

Balbir Singh Gulati ने कहा…

बेहतरीन ग़ज़ल

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

बहुत सुन्दर गजल

JHAROKHA ने कहा…

jakir ji
bahut khoob ,sandeep ji ki gazal padhvane aur usko ham tak pahuchane ke liye aapko bahut hi badhai avam shubh kamna.
खार होंगे, संग होंगे, और होगा क्या वहां?
इश्क की गलियों में 'साहिल' किसने पाए हैं गुलाब?
bahut himan ko bhai gazal
ek bar fir se aabhar
poonam

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत सार्थक और अच्छी सोच ....सुन्दर गज़ल ..

संजय भास्कर ने कहा…

..सुन्दर गज़ल ..

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

Wah,ghazal ka har sher daad ka hakdaar hai.
zakir bhai,Sandeep ji se parichay karaane ke liye shukriya.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल ...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

फर्क इतना है हमारी और उसकी सोच में,
उसने थामी हैं बंदूकें, हम उठाये हैं गुलाब।
bahut khubsurat panktiyan ........

अब असर होता नहीं गर पाँव में काँटा चुभे,
ज़िन्दगी तूने हमें ऐसे चुभाये हैं गुलाब।

bilkul sahi baat

खार होंगे, संग होंगे, और होगा क्या वहां?
इश्क की गलियों में 'साहिल' किसने पाए हैं गुलाब?

ye bhi sahi hai .........

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